CHHATTISGARH BIG BREAKING:कोरोना के चलते 700 साल के इतिहास में पहली बार माँ दंतेश्वरी शक्तिपीठ 14 दिनों के लिए हुआ सील, पहली बार श्रद्धालुओं को रोक दिया गया

दंतेवाड़ा।बस्तर के काकतीय शासनकाल में 700 साल पहले स्थापित दंतेश्वरी शक्तिपीठ के दर्शन से पहली बार श्रद्धालुओं को रोक दिया गया है। कोरोना संकट के कारण मंदिर को सील कर दिया गया है। परिसर में निवास करने वाले एक श्रद्धालु के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद प्रशासन ने एहतियातन यह कदम उठाया है। पीढ़ियों से मंदिर में सेवा दे रहे जिया परिवार के सदस्य व पुजारी हरेंद्रनाथ जिया कहते हैं कि इतिहास में पहली बार हुआ है, जब शक्तिपीठ को सील किया गया है। मंगलवार से मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा उत्सव मां दंतेश्वरी को समर्पित है
परंपरा खंडित न हो इसलिए पुजारी पूजा-पाठ कर रहे हैं। बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा उत्सव मां दंतेश्वरी को समर्पित है। कोरोना काल में अगर हालात नहीं सुधरे तो इस बार इसके आयोजन पर भी असर पड़ सकता है। दंतेवाड़ा से मांईजी की डोली व छत्र हर साल जगदलपुर में आयोजित होने वाले दशहरा में शामिल होने जाते हैं। उसका स्वागत मावली परघाव रस्म के रूप में जगदलपुर में किया जाता है। इस साल इस रस्म के पूरा होने पर भी संशय है। कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव से देवी दंतेश्वरी का मंदिर भी प्रभावित हुआ है।

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27 कोरोना पॉजिटिव मरीजों में एक श्रद्धालु भी शामिल है
विगत सोमवार की शाम जिले में मिले 27 कोरोना पॉजिटिव मरीजों में एक मंदिर परिसर निवासी श्रद्धालु भी शामिल है। मंदिर के करीब आवास होने के कारण वह प्रतिदिन देवी दर्शन को आता था। प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन के दायरे में मंदिर परिसर को भी रखा है।

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14 दिन के लिए मंदिर के साथ आसपास के इलाके भी सील रहेंगे
14 दिन के लिए मंदिर के साथ आसपास के इलाके भी सील रहेंगे। स्वास्थ्य अमला लगातार सर्वे कर रहा है। मंदिर के पुजारी हरेंद्रनाथ जिया ने बताया कि सेवादारों को भी निश्चित समय पर ही परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई है। पिछले लॉकडाउन में मंदिर को बंद रखा गया था, लेकिन परिवार द्वारा देवी के स्नान, ध्यान और पूजा-पाठ के लिए हम पहुंचते रहे। चैत्र नवरात्र में श्रद्धालुओं के मनोकामना दीप प्रज्वलित नहीं किए गए। कई महत्वपूर्ण रस्मों की अदायगी भी प्रतीकात्मक हुई।

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बस्तर दशहरा भी होगा प्रभावित
मंदिर के पुजारी और जानकारों का कहना है कि बस्तर दशहरा पूरी तरह से मांईजी को समर्पित और इसके इर्द-गिर्द रहता है। कोरोना संकट का यही हाल रहा तो बस्तर दशहरा भी प्रभावित होगा। इसमें दंतेवाड़ा से मांईजी की डोली जाकर शामिल होती है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में स्थानीय आदिवासी अपने ग्राम्य देवी-देवताओं के प्रतीक चिन्ह के साथ शामिल होते हैं। इस साल संभवत: यह सब नहीं हो पाएगा।।

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