Abhanpur Girls Library बंद | एक माह में ही अव्यवस्था का शिकार, छात्राएं लौट रहीं खाली हाथ….ताले में कैद छात्राओं का भविष्य!

Abhanpur Girls Library अभनपुर, 20 जून 2025 | विशेष रिपोर्ट एक ओर सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे के साथ बालिकाओं को सशक्त करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के अभनपुर में छात्राओं के लिए शुरू की गई “Abhanpur Girls Library” महज एक महीने में ही ताले और तिरस्कार का प्रतीक बन चुकी है।
महिला बाल विकास विभाग एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और शांत वातावरण देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह लाइब्रेरी अब सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही के चलते बंद पड़ी है।
❌ Abhanpur Girls Library: न पानी, न वॉशरूम, न बिजली – छात्राएं लौटने को मजबूर
Abhanpur Girls Library में आज न तो वॉशरूम की सुविधा है, न पीने के पानी की व्यवस्था और न ही बिजली की सप्लाई। गर्मी के मौसम में बिना पंखे और जल की सुविधा के लाइब्रेरी में बैठना छात्राओं के लिए असंभव हो गया है। इसके चलते छात्राएं वापस लौट रही हैं और पढ़ाई में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
👧 स्थानीय छात्राओं और उनके अभिभावकों में इसको लेकर गहरी नाराजगी है। कई छात्राओं ने बताया कि “लाइब्रेरी में हमें किताबें तो मिलती हैं, लेकिन वहां बैठने तक की सुविधा नहीं।”
🗣️ अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला, SDM बोले – मुझे जानकारी नहीं थी!
जब मीडिया टीम ने इस गंभीर मामले को लेकर महिला बाल विकास विभाग की अधिकारी से जवाब मांगा तो उन्होंने साफ कहा कि “इस मामले में एसडीएम से संपर्क करें।”
वहीं एसडीएम साहब ने माना कि “उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब वे तत्काल संज्ञान लेंगे और पानी-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएंगी।”
🎉 बड़े उद्घाटन, लेकिन छोटी सोच!
गौरतलब है कि महज एक माह पूर्व इस पुस्तकालय का उद्घाटन स्थानीय विधायक श्री इंद्र कुमार साहू द्वारा बड़े धूमधाम से किया गया था।
उन्होंने इसे “बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम” बताया था।
लेकिन हकीकत ये है कि यह पहल बिना व्यवस्था के शुरू की गई, जिसके चलते यह प्रोजेक्ट अब मज़ाक बनकर रह गया है।
⚠️ लड़कियों की शिक्षा को लेकर प्रशासन की असंवेदनशीलता उजागर
- बिना मूलभूत सुविधाओं के लाइब्रेरी खोलना, सिर्फ “औपचारिक उद्घाटन” का हिस्सा बनकर रह गया।
- एक माह के अंदर ही छात्राओं को लौटने को मजबूर करना दर्शाता है कि ग्राउंड लेवल पर योजना का क्रियान्वयन कितना खोखला है।
📌 अभिभावकों की मांग: जल्द हो सुधार वरना आंदोलन तय
स्थानीय अभिभावकों ने कहा कि अगर एक सप्ताह के भीतर लाइब्रेरी में सुविधाएं बहाल नहीं होतीं, तो वे जन आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि छात्राओं को ठोस संसाधन दिए बिना ‘बेटी पढ़ाओ’ एक छलावा है।
Abhanpur Girls Library जैसी पहलें तब ही सफल हो सकती हैं जब उनके पीछे ठोस सोच, संसाधन और निगरानी व्यवस्था हो। एक महीने के भीतर इस हाल में पहुंच जाना केवल अफसरशाही और चुनावी दिखावे की पोल खोलता है।
छात्राओं की पढ़ाई से समझौता बर्दाश्त नहीं — अब देखना यह है कि प्रशासन वादे निभाता है या ये किताबें धूल फांकती रहेंगी?
Abhanpur Girls Library बंद | एक माह में ही अव्यवस्था का शिकार, छात्राएं लौट रहीं खाली हाथ….ताले में कैद छात्राओं का भविष्य!



















