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नगर निगम को बड़ा झटका: लिंगियाडीह बस्ती के 36 घरों को तोड़ने पर हाई कोर्ट की रोक, नगर निगम की कार्रवाई पर लगा ब्रेक

Bilaspur की लिंगियाडीह बस्ती के निवासियों को राहत— कोर्ट ने राज्य सरकार और निगम से मांगा जवाब

नगर निगम को बड़ा झटका: छत्तीसगढ़ के Bilaspur में Chhattisgarh High Court ने लिंगियाडीह बस्ती के 36 निवासियों को बड़ी राहत दी है।

हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए लिंगियाडीह बस्ती में रहने वाले 36 लोगों के घरों और कब्जों को तोड़ने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है। नगर निगम को बड़ा झटका

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नगर निगम रिहायशी जमीन पर कमर्शियल कॉम्पलेक्स बनाने के लिए पीढ़ियों से रह रहे लोगों को बेदखल करने की कोशिश कर रहा है।

 जस्टिस एनके चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने दिया आदेश

इस मामले की सुनवाई Justice N K Chandravanshi की सिंगल बेंच में हुई।

कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता 2019-20 के सर्वे में Rajiv Gandhi Aashray Yojana के तहत पात्र पाए गए थे और सरकार ने उन्हें कब्जे वाली जमीन पर पट्टा देने का निर्णय लिया था।

हालांकि बाद में इस निर्णय को लागू नहीं किया गया और अब उसी जमीन पर व्यवसायिक परिसर और गार्डन बनाने की योजना बनाई गई है।

 कोर्ट ने सरकार से पूछे अहम सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि—

  • योजना के तहत शुल्क लेने के बाद भी पट्टा क्यों नहीं दिया गया?
  • पहले पात्र घोषित लोगों को अब बेदखल क्यों किया जा रहा है?

सरकार की ओर से बताया गया कि 2023 में नियमों में बदलाव होने के कारण अब वहां पट्टा नहीं दिया जा सकता।

इसके बदले में निवासियों को Pradhan Mantri Awas Yojana के तहत दूसरे स्थान पर फ्लैट देने का प्रस्ताव रखा गया है।

 याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने बताया कि—

  • 2019-20 में उन्हें योजना के तहत पात्र घोषित किया गया था
  • वर्ष 2022 में उन्होंने प्रीमियम राशि भी जमा कर दी थी
  • बाद में नियम बदलने से उनके अधिकार खत्म नहीं किए जा सकते
  • कई दशकों से वहां रहने के कारण सरकार अपने वादे से पीछे नहीं हट सकती

उन्होंने यह भी कहा कि उक्त क्षेत्र मास्टर प्लान में रिहायशी क्षेत्र है, जहां कमर्शियल निर्माण नहीं किया जा सकता।

 जून में होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने मामले को विस्तृत सुनवाई योग्य मानते हुए अंतरिम राहत के रूप में घरों को नहीं तोड़ने का आदेश दिया है।

इस मामले की अगली सुनवाई हाई कोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जून माह में होने की संभावना है।

TheBharatExpress Desk

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