BEO ऑफिस में दारू पार्टी: प्रधान पाठक और बाबू सस्पेंड, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के बाद एक्शन, शासकीय कार्यालय में शराब सेवन और अमर्यादित व्यवहार पर गिरी गाज
BEO ऑफिस में दारू पार्टी: Khairagarh जिले के बीईओ कार्यालय में कथित शराब पार्टी का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और लगातार उठ रहे सवालों के बीच शिक्षा विभाग ने दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। BEO ऑफिस में दारू पार्टी
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे जिले में मामले की चर्चा हो रही है। BEO ऑफिस में दारू पार्टी
प्रधान पाठक और बाबू सस्पेंड
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक:
- सहायक ग्रेड-02 Ravindra Singh Gaharwar
- शासकीय प्राथमिक शाला संडी के प्रधान पाठक Sunil Kumar Verma
को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
वायरल वीडियो में क्या दिखा?
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में कुछ कर्मचारी बीईओ कार्यालय परिसर के भीतर कथित तौर पर शराब सेवन करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई थी।
जिस कार्यालय से जिले की शिक्षा व्यवस्था संचालित होती है, वहीं इस तरह की गतिविधियां सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
विभागीय आदेश में कहा गया है कि वायरल वीडियो और समाचार माध्यमों में सामने आई जानकारी प्रथम दृष्टया छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के विपरीत पाई गई।
इसी आधार पर दोनों कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी किया गया।

कई दिनों तक दबाने की कोशिश?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वीडियो वायरल होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई नहीं की। कई दिनों तक मामले को शांत कराने की कोशिश की गई।
लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो लगातार वायरल होने और स्थानीय मीडिया द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद शिक्षा विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी।
विभागीय जांच भी शुरू
आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में दोनों कर्मचारियों का मुख्यालय BEO Office Chhuikhadan निर्धारित किया गया है।
साथ ही पूरे मामले में विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
लोगों में नाराजगी
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में इस तरह की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और समाज में गलत संदेश देती हैं।
सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और अन्य दोषियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की है।









