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Liquor Policy CG: छत्तीसगढ़ में फिर ठेके पर दी जाएंगी शराब दुकानें? कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का बड़ा बयान — BJP ने ही किया था सरकारीकरण

Liquor Policy CG / Raipur | The Bharat Express छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों के निजी ठेके को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि सरकार आबकारी नीति (Liquor Policy) में बदलाव कर शराब की दुकानों को फिर से निजी ठेकेदारों को सौंपने की तैयारी कर रही है। Liquor Policy CG उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने ही पहले शराब का सरकारीकरण किया था, और अब वही पार्टी फिर से निजीकरण (Privatization) की दिशा में जा रही है।

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“निजी ठेकेदारों से लेनदेन करके बदली जा रही नीति” – दीपक बैज

दीपक बैज ने कहा,

“ऐसी चर्चाएं हैं कि सरकार निजी ठेकेदारों से लेनदेन कर शराब नीति में बदलाव करने जा रही है। विपक्ष में रहते हुए भाजपा पूर्ण शराबबंदी की मांग करती थी, अब सत्ता में आने के बाद वह नीति बदलकर शराबबंदी लागू क्यों नहीं कर रही?”

उन्होंने आगे कहा कि यह बदलाव राज्य की आबकारी व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है और इससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

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सरकार और भाजपा ने किया इंकार Liquor Policy CG

इस मामले पर प्रदेश के आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है।
वहीं भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा —

“विपक्ष बेवजह हल्ला मचा रहा है। अभी किसी तरह के ठेके या नीति परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।”

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

शराब नीति को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा अपने चुनावी वादों से पलट रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि कांग्रेस भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। राज्य में शराब नीति को लेकर पहले भी कई बार पूर्ण शराबबंदी बनाम नियंत्रित बिक्री को लेकर बहस होती रही है।

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पृष्ठभूमि: कब हुआ था शराब का सरकारीकरण?

छत्तीसगढ़ में 2017 में भाजपा सरकार ने शराब का सरकारीकरण किया था। उस वक्त यह निर्णय लिया गया था कि सभी शराब दुकानों का संचालन राज्य विपणन निगम (CSMCL) के माध्यम से किया जाएगा ताकि राजस्व पारदर्शी तरीके से सरकार के पास पहुंचे और अवैध बिक्री पर रोक लग सके। अब चर्चा है कि नई आबकारी नीति 2026 से पहले सरकार इस मॉडल में संशोधन या आंशिक निजीकरण पर विचार कर सकती है।

क्या होगी आगे की दिशा?

वर्तमान में राज्य सरकार इस मुद्दे पर अंतिम समीक्षा कर रही है। यदि ठेका प्रणाली लागू की जाती है तो इसका सीधा असर राज्य की राजस्व प्रणाली, दुकानों के प्रबंधन और सामाजिक नियंत्रण पर पड़ेगा। फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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