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Bageshwar dham katha : छत्तीसगढ़ में पांच दिवसीय श्री हनुमंत कथा का हुआ भव्य समापन, पूज्य पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिए आशीर्वचन

Bageshwar dham katha / रायपुर में आयोजित पांच दिवसीय श्री हनुमंत कथा का आज भव्य समापन हुआ। यह पावन आयोजन श्रीनगर रोड, गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में किया गया था, जहां कथा का वाचन बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पूज्य पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने किया। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण “जय श्रीराम” और “बजरंग बली की जय” के जयकारों से गूंज उठा।

समापन दिवस पर विशेष अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे। उन्होंने मंच से कहा कि “छत्तीसगढ़ की यह भूमि माता कौशल्या की मायका और भगवान श्रीराम की ननिहाल है, इस धरती पर कथा का आयोजन अपने आप में सौभाग्य की बात है।” मुख्यमंत्री ने कथा के दौरान एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में जल्द ही गाय को ‘गौमाता’ का दर्जा दिया जाएगा, जिससे प्रदेशभर के गौसेवकों में उत्साह का माहौल बन गया।

कथा के दौरान पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “अगर जीवन में हनुमानजी के चरण पकड़ लिए जाएं, तो वह स्वयं रामजी और शिवजी से भी मिलवा देते हैं।” उन्होंने सनातन धर्म की एकता और बस्तर में हो रहे धर्मांतरण पर भी जोर देते हुए कहा कि “अब धर्मांतरण करने वालों का बोरिया-बिस्तर बंध चुका है, बारी बंगाल की है।”

इस कथा आयोजन का संचालन युवा समाजसेवी चंदन और बसंत अग्रवाल (थान खम्हरिया वाले) द्वारा किया गया, जिन्होंने श्रद्धालुओं, प्रशासन और मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “हम तो सिर्फ माध्यम हैं, कथा करवाने वाले स्वयं हनुमानजी हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ में सनातन संस्कृति को और प्रखर करने का प्रयास है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, अभिरामदेवाचार्य महाराज सहित अनेक संत, महात्मा और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पांच दिवसीय कथा ने भक्तों के हृदय में भक्ति, आस्था और संस्कार का दीप प्रज्वलित किया और छत्तीसगढ़ की भूमि पर सनातन संस्कृति की नई गूंज स्थापित की।

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