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80 किमी/घंटे की रफ्तार से आ रही थी मेमू ट्रेन, सामने दिखी मालगाड़ी और फिर… हादसे में सामने आई बड़ी लापरवाही

Bilaspur MEMU Train Collision :  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में हुए भीषण मेमू ट्रेन हादसे को लेकर जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जॉइंट फाइंडिंग रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिसमें ट्रेन क्रू मेंबर को हादसे के लिए जिम्मेदार बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेमू ट्रेन के लोको पायलट्स ने डेंजर सिग्नल क्रॉस किया, जिसके चलते यह टक्कर हुई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत और 18 यात्री घायल हो चुके हैं। Bilaspur MEMU Train Collision

कैसे हुआ हादसा?

घटना मंगलवार शाम करीब 4 बजे की है, जब कोरबा से बिलासपुर की ओर आ रही मेमू ट्रेन ने गतौरा रेलवे लाइन के पास अपने आगे चल रही एक मालगाड़ी से टक्कर मार दी। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मेमू ट्रेन की पहली कंट्रोल बोगी (महिला कोच) मालगाड़ी के आखिरी डिब्बे पर चढ़ गई।
यह बोगी यात्रियों से भरी हुई थी, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान इसी डिब्बे में हुआ।

रेलवे के सूत्रों के मुताबिक, मेमू ट्रेन टक्कर से ठीक पहले करीब 76 किमी/घंटे की रफ्तार से चल रही थी, और लोको पायलट ने खतरा भांपते ही इमरजेंसी ब्रेक लगाया, जिससे गति घटकर 48 किमी/घंटे पर आ गई। रेलवे का मानना है कि यदि इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगाया जाता, तो यह हादसा और भी भीषण हो सकता था।

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जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?

जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मेमू ट्रेन के क्रू मेंबर ने रेड सिग्नल को इग्नोर किया और ट्रैक पर ट्रेन आगे बढ़ा दी।
हालांकि अब रेलवे यह जांच कर रहा है कि यह मानवीय गलती थी या सिग्नल सिस्टम में तकनीकी खराबी आई थी।
रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि “संभावना है कि सिग्नल की विजिबिलिटी कम रही हो या सिस्टम ने गलत संकेत दिया हो, जिससे लोको पायलट भ्रमित हो गया।”

रेलवे बोर्ड ने हादसे की विस्तृत जांच के लिए Commissioner of Railway Safety (CRS) के नेतृत्व में हाई-लेवल इनक्वायरी कमेटी गठित कर दी है।

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FIR दर्ज, जांच में जुटी पुलिस

बिलासपुर पुलिस ने बुधवार को तोरवा थाने में मामला दर्ज किया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) राजेंद्र जायसवाल ने बताया कि, “रेलवे अधिकारी द्वारा दी गई सूचना के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और रेलवे अधिनियम की कई धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है।” पुलिस ने हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ट्रेन क्रू से पूछताछ शुरू कर दी है।

हादसे का वीडियो वायरल

हादसे के चंद सेकंड बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि टक्कर के बाद ट्रेन की पहली बोगी पूरी तरह मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गई थी। दृश्य इतना भयावह था कि यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग खिड़कियां तोड़कर बाहर कूदने लगे। यह वीडियो ‘अरपा सन्देश’ नामक इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट किया गया है, जिसे अब हजारों बार शेयर किया जा चुका है।

 

 

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मृत छात्रा प्रिया चंद्रा को अंतिम विदाई

इस हादसे में जांजगीर-चांपा की रहने वाली बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा प्रिया चंद्रा की भी मौत हो गई। वह गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर में पढ़ाई कर रही थी। आज उनका शव जब गृहग्राम बहेराडीह पहुंचा, तो पूरा गांव शोक में डूब गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी है।

सरकार का मुआवजा ऐलान

राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50 हजार की आर्थिक सहायता राशि देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल के माध्यम से हादसे की जानकारी ली और अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

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कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा – “मुआवजा अपर्याप्त”

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने मुआवजे की राशि को अपर्याप्त बताया है।
उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को ₹1 करोड़ और घायलों को ₹50 लाख की सहायता राशि दी जानी चाहिए।
दीपक बैज ने कहा –

“हम राजनीति नहीं, इंसाफ की बात कर रहे हैं। रेलवे सिस्टम फेल हो चुका है और यात्री ट्रेनें भगवान भरोसे चल रही हैं।”

घायलों से मिले डिप्टी सीएम

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बिलासपुर के विभिन्न अस्पतालों का दौरा कर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों के इलाज की जानकारी ली और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान महापौर पूजा विधानी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसपी रजनेश सिंह, और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे।

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सुरक्षा सवालों के घेरे में रेलवे

यह हादसा ऐसे वक्त हुआ है जब रेलवे लगातार “ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम” को सुरक्षित बताता रहा है। लगातार हो रहे हादसों ने अब इस तकनीक की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सिग्नल सिस्टम और मानव मॉनिटरिंग दोनों को समान प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।

 

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