DGP-IGP Conference 2025: रायपुर बना HIGH सिक्योरिटी ज़ोन…अगली कॉन्फ्रेंस तक नक्सल-मुक्त होगा देश, रायपुर में PM मोदी और शाह पहुंचे
DGP-IGP Conference 2025
DGP-IGP Conference 2025 / रायपुर : देश की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के इरादे से आज से रायपुर में 3-दिवसीय DGP–IGP सम्मेलन शुरू हो गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने उद्घाटन किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में शामिल हुए। अमित शाह ने घोषणा की कि अगली DGP–IGP सम्मेलन तक देश नक्सल-मुक्त हो सकता है।

उन्होंने बताया कि 2014 में 126 नक्सल प्रभावित जिले थे, जो अब केवल 11 बचे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाए हैं। सम्मेलन में नक्सलवाद, आतंकवाद, साइबर अपराध, महिलाओं की सुरक्षा, फोरेंसिक और अन्य आधुनिक चुनौतियों पर व्यापक रणनीति तय होगी — ताकि देश पूर्ण रूप से सुरक्षित बने। सरकार का लक्ष्य है कि नक्सल-मुक्त भारत जल्द दिखाई दे।
रायपुर में 3-दिवसीय सुरक्षा सम्मेलन शुरू
इस साल 60th All-India DGP–IGP Conference की शुरुआत 28 नवंबर 2025 को रायपुर (नया रायपुर, IIM परिसर) से हो गई है। उद्घाटन Amit Shah ने किया, जबकि Narendra Modi शाम को रायपुर पहुंचे।
सम्मेलन में देश भर के DGPs और IGPs, साथ ही अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भाग ले रहे हैं। इसमें आंतरिक सुरक्षा, नक्सलवाद, आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, नशीली दवाओं, महिला सुरक्षा, फॉरेंसिक, आधुनिक पुलिसिंग जैसी कई अहम विषयों पर रणनीति तय की जाएगी।
मुख्य घोषणा — “अगली DGP-IGP कॉन्फ्रेंस तक होगा देश नक्सल-मुक्त”
उद्घाटन के अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने भरोसा जताया कि अगर सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी सक्रियता के साथ काम करें, तो अगली DGP–IGP कॉन्फ्रेंस तक देश “नक्सल-मुक्त” हो सकता है।
उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2014 में 126 थी, जो अब घटकर मात्र 11 रह गई है। साथ ही, पिछले 7 साल में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाए गए — जिससे नक्सलवाद पर बड़ी कामयाबी मिली है।
सरकार अब नक्सलवाद के अलावा नारकोटिक्स, संगठित अपराध और अन्य सुरक्षा चुनौतियों पर भी 360-डिग्री रणनीति तैयार कर रही है।
PM मोदी का आगमन — सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
प्रधानमंत्री मोदी को रायपुर स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर गृहमंत्री अमित शाह, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वागत किया।
रायपुर और नया रायपुर पूरे तीन दिन के लिए हाई-सिक्योरिटी जोन बन गए हैं — SPG और केंद्रीय बलों ने सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली है।
सम्मेलन का महत्व और दृष्टिकोण
यह पहली बार है कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन छत्तीसगढ़ में हो रहा है — यह राज्य पिछले कई सालों से नक्सलवाद से जूझ रहा रहा है, इसलिए रणनीति और अनुभव साझा करने के लिहाज़ से यह बहुत मायने रखता है।
सम्मेलन में सिर्फ नक्सलवाद ही नहीं — साइबर अपराध, ड्रग्स, महिला सुरक्षा, आतंकवाद, आधुनिक पुलिसिंग टेक्नोलॉजी जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में हैं। इससे उम्मीद है कि एक समग्र आंतरिक सुरक्षा रणनीति बनेगी।









