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EOW की बड़ी कार्रवाई: शराब घोटाले और कोल लेवी वसूली प्रकरण में EOW का छापा, तीन राज्यों में दबिश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले और अवैध कोल लेवी वसूली मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने आज तड़के बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। ब्यूरो की टीमों ने रायपुर सहित बिहार और झारखंड में कुल सात ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस छापेमारी का मुख्य निशाना कारोबारी अवधेश यादव और उससे जुड़े करीबी लोगों के ठिकाने रहे।

मिली जानकारी के अनुसार EOW ने रायपुरा देवनगरी सोसाइटी स्थित अवधेश यादव के आलीशान मकान, उसके दो अन्य करीबियों के ठिकानों के साथ ही बिहार व झारखंड में मौजूद दो-दो ठिकानों पर दबिश दी। बताया जा रहा है कि बिहार और झारखंड में छापे अवधेश यादव के रिश्तेदारों के घरों पर मारे गए।

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शराब घोटाले में कवासी लखमा के नजदीकी पर आरोप

अवधेश यादव का नाम सीधे तौर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री कवासी लखमा से जोड़ा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अवधेश यादव, कवासी लखमा का करीबी है और उनके बेटे हरीश लखमा के इशारे पर ही बस्तर संभाग की सरकारी शराब दुकानों से सिंडिकेट की शराब की अफरातफरी की जाती थी। आरोप है कि अवधेश यादव न केवल शराब की सप्लाई राज्यभर में करता था बल्कि इसे दूसरे राज्यों तक पहुंचाने का काम भी करता था।

चौंकाने वाली बात यह है कि पुख्ता सूत्रों के अनुसार, अवधेश यादव हर महीने लगभग 25 लाख रुपये की राशि कवासी लखमा तक पहुंचाता था। इस घोटाले में कांकेर और कोंडागांव जिले के दो अन्य सहयोगियों की भी संलिप्तता बताई जा रही है, हालांकि ये दोनों इस समय फरार हैं।

दस्तावेज, नगद और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त

EOW की कार्रवाई अपराध क्रमांक 04/2024 के तहत की गई। छापे के दौरान टीम ने घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, संपत्ति से संबंधित कागजात और नगद रकम जब्त की है। अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए सभी सामग्रियों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है और संदेहियों से पूछताछ की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ नए नाम भी सामने आ सकते हैं।

सौम्या चौरसिया के निज सहायक पर भी कार्रवाई

इसी बीच, EOW ने अवैध कोल लेवी वसूली घोटाले के सिलसिले में भी छापेमारी की। यह कार्रवाई जयचंद कोसले के रायपुर और जांजगीर-चांपा स्थित ठिकानों पर की गई। कोसले पूर्ववर्ती सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रही सौम्या चौरसिया का निज सहायक रहा है और आरोप है कि उसने इस घोटाले में मुख्य सहयोगी के तौर पर काम किया।

सूत्रों के अनुसार, जयचंद कोसले ने इस अवैध वसूली से करीब 50 करोड़ रुपये की काली कमाई की है। रायपुर के अविनाश ग्रीन सिटी स्थित उसके निवास और जांजगीर-चांपा के अन्य ठिकानों से भी घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज, मोबाइल फोन और संपत्ति से संबंधित कागजात जब्त किए गए हैं।

जांच जारी, टीम लौटी नहीं

फिलहाल रायपुर स्थित ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। वहीं बिहार और झारखंड में दबिश देने गई टीमें अभी भी लौटकर नहीं आई हैं। ब्यूरो अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आधार पर कई और राज खुलने की उम्मीद है। इस छापेमारी से एक बार फिर छत्तीसगढ़ के चर्चित घोटाले सुर्खियों में आ गए हैं।

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