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दुष्कर्म पीड़िता को मिली बड़ी राहत: पीड़िता का विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होगा गर्भपात, हाई कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

14 सप्ताह की गर्भवती पीड़िता की याचिका पर हाई कोर्ट का फैसला, सिम्स या जिला अस्पताल में भर्ती कर सुरक्षित मेडिकल प्रक्रिया कराने के आदेश

दुष्कर्म पीड़िता को मिली बड़ी राहत: Chhattisgarh High Court ने दुष्कर्म से गर्भवती हुई पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। दुष्कर्म पीड़िता को मिली बड़ी राहत

कोर्ट ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में पीड़िता का गर्भपात कराने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।

बताया गया है कि पीड़िता लगभग 14 सप्ताह की गर्भवती है। दुष्कर्म पीड़िता को मिली बड़ी राहत

 कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई जस्टिस N. K. Vyas की सिंगल बेंच में हुई।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा:

  • दुष्कर्म पीड़िता को यह अधिकार होना चाहिए कि वह गर्भ जारी रखना चाहती है या नहीं
  • जबरन गर्भ जारी रखना पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है
  • न्यायिक आदेश के बिना चिकित्सक गर्भपात नहीं कर सकते थे, इसलिए कोर्ट हस्तक्षेप आवश्यक था

 पीड़िता ने याचिका में क्या कहा?

पीड़िता ने अपनी याचिका में बताया कि:

  • वह दुष्कर्म की घटना के कारण गर्भवती हुई
  • गर्भावस्था उसे मानसिक और शारीरिक पीड़ा दे रही है
  • वह आरोपी से बच्चा नहीं चाहती
  • घटना के कारण सामाजिक अपमान और मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है

पीड़िता ने कोर्ट से विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में सुरक्षित गर्भपात कराने की मांग की थी।

 सिम्स या जिला अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश

कोर्ट ने आदेश दिया है कि:

  • पीड़िता को तत्काल
    • Chhattisgarh Institute of Medical Sciences (सिम्स)
    • या जिला अस्पताल

में भर्ती कराया जाए।

साथ ही:

  • पूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए
  • विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित की जाए
  • माता-पिता की सहमति के बाद गर्भपात की प्रक्रिया की जाए

 DNA सैंपल सुरक्षित रखने के आदेश

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि:

  • गर्भपात के बाद डीएनए सैंपल सुरक्षित रखा जाए

क्योंकि आरोपी के खिलाफ निचली अदालत में आपराधिक मामला लंबित है और भविष्य में जांच व ट्रायल के लिए यह महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है।

 पहले मेडिकल जांच रिपोर्ट मांगी गई थी

19 मई 2026 को वेकेशन कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान:

  • बिलासपुर CMHO को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाने
  • पीड़िता का स्वास्थ्य परीक्षण कराने
  • मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के तहत रिपोर्ट पेश करने

का निर्देश दिया गया था।

TheBharatExpress Desk

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