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Carbide Gun Accident: 150 की कार्बाइड गन ने छीन ले गई 300 आंखों की रोशनी, प्रदेश में मच गया हड़कंप… इस विस्फोटक जुगाड़ की चपेट में 8 से 14 वर्ष के बच्चे

Carbide Gun Accident / Bhopal, MP: दिवाली के जश्न में इस बार मध्य प्रदेश में एक भयानक हादसा देखने को मिला। होममेड कार्बाइड बंदूकों (Carbide Gun) के विस्फोट के कारण लगभग 300 लोगों की आंखों में चोटें आई हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, 30 लोगों की स्थिति गंभीर है और उनकी आंखों की रोशनी खतरे में है।

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खिलौना दिखने वाला, लेकिन खतरनाक हथियार Carbide Gun Accident

कार्बाइड बंदूकें आमतौर पर घर पर बनाई जाती हैं। ये टिन या प्लास्टिक पाइप से बनी होती हैं और कैल्शियम कार्बाइड और पानी के रासायनिक मिश्रण से विस्फोट करती हैं। विशेषज्ञों ने इसे ‘रासायनिक बम’ से तुलना की है।

अधिकारियों ने बताया कि इन बंदूकों में कैल्शियम कार्बाइड, बारूद और माचिस की तीलियाँ शामिल होती हैं। जब कैल्शियम कार्बाइड पानी में मिलता है, तो एसिटिलीन गैस बनती है। इसके जलने से शक्तिशाली विस्फोट होते हैं और हानिकारक गैसें निकलती हैं।

हालांकि ये उपकरण खिलौने जैसी दिखती हैं, लेकिन इनमें शामिल रासायनिक और विस्फोटक पदार्थ बेहद खतरनाक हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसे PVC Monkey Repeller Gun के नाम से बेचा जाता है और पारंपरिक पटाखों का विकल्प बताया जाता है।

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रेटिना फटने से तत्काल अंधापन

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर विस्फोट बैरल के अंदर ठीक से नहीं होता, तो बच्चे इसे देखने या अंदर झांकने की कोशिश करते हैं। इससे रेटिना फटने का खतरा बढ़ जाता है और तुरंत अंधापन हो सकता है।

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती 17 वर्षीय नेहा ने बताया,

“हमने घर में बनी कार्बाइड बंदूक खरीदी थी। जब वह फटी, तो मेरी एक आंख पूरी तरह जल गई। मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है।”

डॉ. हेमलता यादव (भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल) और डॉ. अदिति दुबे (नेत्र विशेषज्ञ) ने चेतावनी दी कि एसिटिलीन गैस सांस लेने पर भी खतरनाक है। इसके प्रभाव में मस्तिष्क में सूजन, सिरदर्द, चक्कर, हाइपोक्सिया और स्मृति दोष जैसी दीर्घकालिक समस्याएं भी शामिल हो सकती हैं।

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अल्कलाइन इंजरी और गंभीरता

अनौपचारिक रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 300 मामलों में अलग-अलग डिग्री की अल्कलाइन इंजरी देखने को मिली। एम्स भोपाल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा के मुताबिक,

“एसिड इंजरी कम गंभीर होती है, लेकिन अल्कलाइन इंजरी गंभीर और स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकती है। उपचार केवल आगे की गिरावट को रोकने पर केंद्रित होता है।”

प्रतिबंध के बावजूद बिकती रही गन

सरकार ने दिवाली से दो हफ्ते पहले इन उपकरणों पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार में ये बंदूकें बिकती रही। कीमत आमतौर पर 150–200 रुपये होती है, जबकि ऑनलाइन 500–2,000 रुपये तक बेची जा रही हैं।

विक्रेताओं द्वारा इग्निशन मैकेनिज्म और सुरक्षा दस्ताने भी पैकेज में शामिल किए जाते हैं, जिससे ये सुरक्षित और वैध उपकरण जैसा दिखता है।

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सोशल मीडिया ने बढ़ाई क्रेज

विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स, के कारण बच्चों में कार्बाइड बंदूक चलाने का क्रेज बढ़ा। एक पीड़ित ने कहा,

“मैंने सोशल मीडिया पर वीडियो देखे और घर पर इसे बनाने की कोशिश की। यह मेरे चेहरे पर फट गई और मेरी एक आंख चली गई।”

जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई

उप-मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि अधिकांश मामले भोपाल और पड़ोसी जिलों से आए। भोपाल में सात बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें हमीदिया अस्पताल में भर्ती किया गया। ग्वालियर और विदिशा से भी कई मामले सामने आए।

सरकार ने एक मेडिकल टीम का गठन कर बच्चों का इलाज सुनिश्चित किया और कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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