CG News जानकारी के मुताबिक, पलारी नगर पंचायत अध्यक्ष यशवर्धन वर्मा शुक्रवार देर रात अपने कुछ साथियों के साथ पलारी बस स्टैंड के पास शराब पी रहे थे और तेज आवाज में अश्लील गाने सुन रहे थे। इसकी जानकारी स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी, जिसके बाद पलारी थाना के टीआई केसर पराग ने दो कांस्टेबल मनीष बंजारे और मोहन राय को मौके पर भेजा।
जब दोनों कांस्टेबल शराब पी रहे व्यक्तियों को शांत करने और सार्वजनिक रूप से शराब पीने से रोकने गए, तो नगर पंचायत अध्यक्ष यशवर्धन वर्मा गुस्से में आ गए और पुलिसकर्मियों से बहस करने लगे। आरोप है कि उन्होंने दोनों पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद जिले के कई बीजेपी नेता, सहित बीजेपी जिला अध्यक्ष सनम जांगड़े भी पलारी थाने पहुँच गए, जहां उन्होंने घंटों तक हंगामा किया।
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पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई
CG News घटना के बाद, पलारी थाना के टीआई केसर पराग और दो कांस्टेबल मनीष बंजारे और मोहन राय को तत्काल निलंबित कर दिया गया। एसपी विजय अग्रवाल ने यह कार्रवाई करते हुए मामले को गंभीरता से लिया और यह स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई अनुशासनहीनता को बढ़ावा दे सकती है। निलंबित टीआई और कांस्टेबल का कहना है कि यदि इस प्रकार की कार्रवाई होती रही, तो पुलिस कभी भी अपनी कार्यप्रणाली को सही तरीके से नहीं चला पाएगी।
निलंबित टीआई और कांस्टेबल ने आरोप लगाया कि उनके साथ किया गया यह कदम पूरी तरह से पक्षपाती था और उन्होंने कहा कि यह पुलिस के काम में दखलंदाजी है, जिससे उनका मनोबल गिरा है।
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सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू
इस घटना के बाद, राजनीति भी गरमा गई है। नगर पंचायत अध्यक्ष यशवर्धन वर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और बिना किसी कारण उन्हें दोषी ठहराया। उनका कहना था कि यह एक साजिश थी, जिसे बीजेपी नेताओं के इशारे पर अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनकी इज्जत को चोट पहुँचाई और गलत आरोप लगाया।
वहीं, कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इस पूरे घटनाक्रम को सत्ता के नशे में चूर बीजेपी नेताओं की करतूत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता और गृह मंत्री के संरक्षण में अपराधी बेलगाम हो गए हैं और उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला करके यह साबित कर दिया कि उनका कोई भी काम सुरक्षित नहीं है। शुक्ला ने कहा कि बीजेपी के नेता सत्ता के मद में इस कदर चूर हैं कि वे किसी भी कानून को नहीं मानते और पुलिसकर्मियों को भी निशाना बना रहे हैं।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने आरोप लगाया कि यह घटना पूरी तरह से एक साजिश थी और पुलिस ने जानबूझकर उनके नेताओं के खिलाफ गलत आरोप लगाए। बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने इसे विपक्ष की राजनीति का हिस्सा बताया और कहा कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई गलत थी। उन्होंने दावा किया कि नगर पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से पहले, पुलिस को पूरी जांच करनी चाहिए थी।
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अब क्या होगा?
यह विवाद अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है, जबकि प्रशासन भी इस विवाद के बाद शांतिपूर्वक स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है। इस घटना के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या बीजेपी नेताओं के खिलाफ पुलिस को खुलकर कार्रवाई करने का मौका मिलेगा या फिर यह मामला सियासी दबाव में दब जाएगा।
कुल मिलाकर, पलारी नगर पंचायत में शुक्रवार रात का विवाद अब छत्तीसगढ़ की राजनीति और पुलिसिंग पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस पर कैसे प्रतिक्रिया आती है।
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