RTI Petition Rejected: महिला पुलिस अधिकारी से जुड़ी शिकायतें नहीं होंगी सार्वजनिक, हाईकोर्ट ने खारिज की RTI याचिका
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा- विभागीय शिकायत और जांच रिपोर्ट ‘निजी सूचना’, ठोस जनहित के बिना साझा नहीं की जा सकती
RTI Petition Rejected: Chhattisgarh High Court ने सूचना के अधिकार (RTI) और व्यक्तिगत गोपनीयता को लेकर अहम फैसला सुनाया है।
हाई कोर्ट ने एक महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ दर्ज शिकायतों और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस P. P. Sahu की एकलपीठ ने कहा कि:
- विभागीय शिकायतें
- जांच रिपोर्ट
- जांच अधिकारियों की जानकारी
व्यक्तिगत सूचना (Personal Information) की श्रेणी में आती हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस जनहित के ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
क्या था पूरा मामला?
मामला Balod जिले में पदस्थ एक महिला सब इंस्पेक्टर से जुड़ा है।
एक RTI आवेदक ने पुलिस विभाग से मांगी थी:
- महिला अधिकारी के खिलाफ हुई शिकायतों की प्रतियां
- जांच रिपोर्ट
- जांच अधिकारी का पूरा विवरण
लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने RTI Act की धारा 11 का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया।
विभागीय अपील से लेकर हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
सूचना नहीं मिलने पर आवेदक ने:
- विभागीय अपील की
- राज्य सूचना आयोग में गुहार लगाई
- बाद में हाई कोर्ट में याचिका दायर की
याचिकाकर्ता ने सूचना उपलब्ध कराने के साथ मुआवजे और जुर्माने की भी मांग की थी।
जनहित साबित नहीं कर पाया आवेदक
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा:
- पारदर्शिता का अधिकार असीमित नहीं है
- निजी जानकारी साझा करने के लिए व्यापक जनहित जरूरी है
कोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि मांगी गई जानकारी से समाज को क्या लाभ होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में Supreme Court of India के पूर्व फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि:
- किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक नहीं किया जा सकता
- RTI कानून की धारा 11 के तहत तीसरे पक्ष को सुनवाई का अवसर देना जरूरी ह









