LIVE UPDATE
छत्तीसगढ

Chhattisgarh Green Summit 2026 :छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट 2026 का शुभारंभ: पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास पर हुआ मंथन

Chhattisgarh Green Summit 2026 रायपुर। राजधानी में आयोजित Chhattisgarh Green Summit 2026 – Sustainable Synergy: Traditionally Futuristic का भव्य शुभारंभ पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभागार में हुआ। इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक के समन्वय पर मंथन करना रहा।

इस समिट का आयोजन महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज (MAIC), विबग्योर फाउंडेशन, एनटीपीसी, एनएमडीसी और एसईसीएल के प्रमुख सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, पर्यावरण, उद्योग और प्रशासन से जुड़े कई विशेषज्ञों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रहे मुख्य अतिथि
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं विशिष्ट अतिथियों में सी.पी. मराक (अध्यक्ष, लोकायुक्त मेघालय), वी. श्रीनिवास राव (आईएफएस, पीसीसीएफ एवं एचओएफएफ, छत्तीसगढ़), प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला (कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय), डॉ. रमेश अग्रवाल (अध्यक्ष, MAIC), डॉ. शैलेन्द्र पटेल (कुलसचिव), शंखदीप चौधरी (अध्यक्ष, विबग्योर एन.ई. फाउंडेशन) और अरुण पाण्डेय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण से हुई। इसके बाद राज्यगीत और राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया गया तथा पिछले वर्ष आयोजित ग्रीन समिट पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ वन संपदा, आदिवासी संस्कृति और प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ राज्य है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।
वहीं कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।

संस्कृति और परंपरा की भी दिखी झलक

समिट में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान माड़ी कर्मा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। साथ ही कलाकार राकेश तिवारी और रेखा देवार ने भाट-भटनी और दशमत कहानी की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

समिट परिसर में हाथ करघा, छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा और भित्ति चित्र से जुड़े कई स्टॉल भी लगाए गए हैं, जहां स्थानीय कला और हस्तशिल्प की झलक देखने को मिल रही है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, असम और मेघालय की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम को खास बना दिया।

आगामी दिनों में भी कला, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े कई रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा सके।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *