Fake multispeciality hospital ! अस्पताल नकली – पैसा असली ! रिहैब सेंटर या 2025 multispeciality hospital ?
रिहैब सेंटर की आड़ में इलाज,

Fake multispeciality hospital ! रायपुर। राजधानी रायपुर से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। रायपुरा चौक स्थित 2050 अस्पताल पर कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। यह संस्थान मुख्य रूप से रिहैब सेंटर के रूप में संचालित बताया जाता है, लेकिन यहां गंभीर मरीजों का इलाज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल के नाम का विधिवत पंजीयन तक नहीं कराया गया है। इसके बावजूद यहां लगातार मरीजों का उपचार किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह स्वास्थ्य नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
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गंभीर मरीजों के इलाज के आरोप
जानकारी के मुताबिक, 2050 अस्पताल को रिहैब सेंटर के रूप में संचालित किया जा रहा है। हालांकि, यहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज भी किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे इलाज के लिए आवश्यक अनुमति और संसाधनों की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं।
फायर सेफ्टी पर भी उठे सवाल
अस्पताल में स्थापित फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। किसी भी आपात स्थिति में यह लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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कैंटीन के खाने की गुणवत्ता संदिग्ध
अस्पताल की कैंटीन में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारी के अनुसार, खाने में कील निकलने जैसी शिकायतें पहले सामने आ चुकी हैं। यही वजह है कि खाद्य विभाग की टीम भी पहले यहां जांच और छापेमारी कर चुकी है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना पंजीयन और इतने गंभीर आरोपों के बावजूद यह अस्पताल आखिर किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है।
कार्रवाई का इंतजार
एक तरफ सरकार प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर राजधानी में इस तरह नियमों की अनदेखी चिंता बढ़ाने वाली है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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NOTE / यह समाचार स्थानीय सूत्रों, उपलब्ध दस्तावेजों और प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित संस्थान या प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। जांच या प्रशासनिक कार्रवाई के बाद तथ्यों में परिवर्तन संभव है।

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