कैंसर पीड़ित शिक्षिका को राहत: थर्ड स्टेज कैंसर से जूझ रही शिक्षिका को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, गृह जिले में तबादले पर 3 हफ्ते में फैसला लेने के निर्देश
कैंसर पीड़ित शिक्षिका की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, स्कूल शिक्षा सचिव को मानवीय आधार पर निर्णय लेने कहा

कैंसर पीड़ित शिक्षिका को राहत: High Court of Chhattisgarh ने गंभीर बीमारी से जूझ रही एक शिक्षिका को बड़ी राहत दी है। तीसरे चरण के कैंसर से पीड़ित शिक्षिका द्वारा गृह जिले में तबादले की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को मानवीय आधार पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने स्कूल शिक्षा सचिव को आदेशित किया है कि शिक्षिका के अभ्यावेदन पर तीन सप्ताह के भीतर नियमानुसार उचित फैसला लिया जाए। कैंसर पीड़ित शिक्षिका को राहत
थर्ड स्टेज कैंसर से पीड़ित हैं शिक्षिका
मामले की सुनवाई जस्टिस Parth Pratim Sahu की एकलपीठ में हुई।
याचिकाकर्ता शिक्षिका किरण साहू वर्तमान में Sitapur विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला कुधारापानी में पदस्थ हैं। याचिका में बताया गया कि उन्हें बड़ी आंत और मलाशय के बीच थर्ड स्टेज कैंसर है और उनका इलाज लगातार नया रायपुर स्थित बालको कैंसर अस्पताल में चल रहा है।
पांच बार हो चुकी कीमोथेरेपी
दस्तावेजों के अनुसार अब तक शिक्षिका की पांच बार कीमोथेरेपी हो चुकी है। वहीं 5 मई 2026 को उन्हें छठवीं कीमोथेरेपी के लिए दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
लगातार इलाज और खराब स्वास्थ्य की वजह से सरगुजा से नया रायपुर तक लंबी दूरी तय करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
गृह जिले में तबादले की लगाई गुहार
शिक्षिका ने अपने अधिवक्ता रामचरण साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि उनका तबादला गृह जिला Mahasamund या आसपास के क्षेत्र में किया जाए, ताकि इलाज और पारिवारिक सहयोग आसानी से मिल सके।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि गंभीर बीमारी की स्थिति में दूरस्थ क्षेत्र में पदस्थापना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने दिए ये निर्देश
हाईकोर्ट ने शिक्षिका को स्कूल शिक्षा सचिव के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सचिव को आदेशित किया गया है कि आवेदन मिलने के तीन सप्ताह के भीतर नियमों के तहत संवेदनशीलता के साथ उचित निर्णय लिया जाए।
कर्मचारी हितों से जुड़ा अहम फैसला
हाईकोर्ट के इस आदेश को मानवीय संवेदनाओं और कर्मचारी हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों को दूरस्थ इलाकों में पदस्थ रहने के कारण इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अदालत का यह निर्देश राहतभरा माना जा रहा है।









