Bilaspur High Court: शादीशुदा होने की जानकारी थी, इसलिए शादी का झांसा देकर रेप का आरोप नहीं— हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
Chhattisgarh High Court का अहम फैसला— महिला को पहले से पुरुष के विवाहित होने की जानकारी, निचली अदालत का फैसला बरकरार

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ के Chhattisgarh High Court ने विवाहित पुरुष से संबंध और दुष्कर्म के आरोप से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है।
हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यदि किसी महिला को पहले से पता हो कि पुरुष शादीशुदा है और फिर भी वह उसके साथ संबंध बनाती है, तो बाद में वह शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने या धोखाधड़ी का आरोप नहीं लगा सकती।
कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ निचली अदालत द्वारा आरोपी को बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए महिला की अपील खारिज कर दी।
महिला ने खुद की पैरवी, निचली अदालत का फैसला बरकरार
इस मामले में महिला ने हाई कोर्ट में खुद अपनी पैरवी की थी।
मामले की सुनवाई Justice Sanjay S. Agrawal की सिंगल बेंच में हुई।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए महिला की अपील को खारिज कर दिया।
जानिए क्या था पूरा मामला
मामला Dongargarh निवासी एक महिला से जुड़ा है।
महिला का दावा:
- 8 मई 2008 को आरोपी महेश के साथ विवाह होने की बात कही
- 21 जनवरी 2009 को शादी का इकरारनामा तैयार किया गया
- दोनों पति-पत्नी की तरह साथ रहते थे
- महिला ने अलग-अलग यात्राओं में लगभग ₹85,000 खर्च करने का दावा किया
- पैसे देने से मना करने पर आरोपी ने घर से निकालने का आरोप
इसके बाद महिला ने आरोपी पर धोखाधड़ी और अन्य आरोप लगाते हुए निचली अदालत में मामला दर्ज कराया था।
कोर्ट ने बताया— इकरारनामा पहले से ही शून्य
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत शादी का इकरारनामा कानूनी रूप से मान्य नहीं था।
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणी:
- आरोपी की पहली पत्नी जीवित थी
- महिला को पुरुष के विवाहित होने की जानकारी थी
- इस कारण शादी का इकरारनामा पहले से ही अमान्य था
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह इकरारनामा Hindu Marriage Act की धारा 5 और 11 के तहत शून्य माना जाएगा।
IPC धारा 493 पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने Indian Penal Code Section 493 से जुड़े प्रावधानों पर भी टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि:
- इस धारा के तहत अपराध का मुख्य तत्व धोखाधड़ी होता है
- जब महिला को पहले से पता हो कि पुरुष शादीशुदा है
- तब उसे वैध पत्नी होने का भ्रम नहीं माना जा सकता
इस आधार पर अदालत ने धोखाधड़ी का मामला भी लागू नहीं माना।
कोर्ट का स्पष्ट मत— पत्नी जीवित हो तो धोखाधड़ी नहीं
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब दोनों पक्षों को पता हो कि वे कानूनी रूप से विवाहित नहीं हैं और पुरुष की पत्नी जीवित है, तो धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता।
इसी आधार पर महिला की याचिका को खारिज कर दिया गया।



















