CG NEWS: हैंडपंप मैकेनिकों के 414 पद खाली, मंत्रियों के इलाकों में भी सरकारी बोरवेल भगवान भरोसे
प्रदेशभर में आधे से ज्यादा पद खाली, बोरवेल मरम्मत पर संकट / गर्मी में बढ़ सकता है जल संकट, आधे से कम मैकेनिकों के भरोसे चल रहा पीएचई विभाग का सिस्टम

CG NEWS : Raipur। गर्मी के मौसम में जहां ग्रामीण इलाकों में तालाब और कुएं सूखने लगते हैं, वहीं अब सरकारी हैंडपंप और बोरवेल सिस्टम भी भगवान भरोसे चलता नजर आ रहा है। CG NEWS
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधीन आने वाले सरकारी बोरवेल और हैंडपंप की मरम्मत व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेशभर में स्वीकृत पदों में से करीब 414 हैंडपंप मैकेनिकों के पद खाली पड़े हैं।
जहां प्रदेश में 876 मैकेनिक होने चाहिए, वहां सिर्फ 462 मैकेनिक ही काम कर रहे हैं। ऐसे में यदि गर्मी के मौसम में बोरवेल खराब हो जाए, तो उसके तत्काल सुधार की उम्मीद बेहद कम हो जाती है।
गांवों में बढ़ सकता है जल संकट
गर्मी के दिनों में ग्रामीण इलाकों की बड़ी आबादी हैंडपंप और बोरवेल पर निर्भर रहती है। ग्राम पंचायतों में पानी टंकी और बोरवेल निर्माण के बाद इनकी देखरेख और मरम्मत का जिम्मा पीएचई के हैंडपंप मैकेनिकों पर है।
पेयजल को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में रखा गया है, इसके बावजूद विभाग द्वारा रिक्त पदों को भरने में तत्परता नहीं दिखाई जा रही है। इसका सीधा असर इस गर्मी के सीजन में देखने को मिल सकता है।
यदि किसी गांव में हैंडपंप या बोरवेल खराब होता है, तो ग्रामीणों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है, जिससे भीषण जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
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राजधानी से लेकर जिलों तक खराब स्थिति
राजधानी Raipur में ही स्थिति चिंताजनक है। यहां 24 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ 9 हैंडपंप मैकेनिक ही काम कर रहे हैं।
इसी तरह अन्य जिलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है:
- Mahasamund — 30 पद में 15 कार्यरत
- Dhamtari — 24 पद में 14 कार्यरत
- Gariaband — 12 कार्यरत, 18 पद खाली
- Durg — 10 कार्यरत, 8 पद खाली
- Balod — 29 पद में केवल 12 कार्यरत
प्रदेश में ऐसा कोई जिला नहीं दिख रहा, जहां 75 प्रतिशत पद भरे हों। इससे साफ है कि मरम्मत व्यवस्था गंभीर दबाव में है।
रायगढ़ की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक
कई जिलों में स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। खासकर Raigarh जिले की हालत चिंताजनक मानी जा रही है।
यहां 42 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 23 पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसके अलावा:
- Rajnandgaon — 18 पद में 9 कार्यरत
- Bilaspur — 26 पद में 13 कार्यरत
- Korba — 30 पद में 13 रिक्त
- Janjgir-Champa — 29 पद में 16 कार्यरत
इन आंकड़ों से साफ है कि कई बड़े जिलों में आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं।
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सीएम के जिले जशपुर में भी हालत खराब
आदिवासी क्षेत्र और मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के जिले Jashpur में भी स्थिति बेहतर नहीं है।
यहां 48 स्वीकृत पदों में से 22 पद रिक्त हैं। वहीं आदिवासी जिले Bastar में भी 41 में से 22 पद खाली पड़े हुए हैं।
सरगुजा और बस्तर संभाग के अन्य जिलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है।
जनहित से जुड़ा बड़ा मुद्दा, जल्द भरने की जरूरत
यह मामला सीधे तौर पर आम जनता की दैनिक जरूरत से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते रिक्त पदों को नहीं भरा गया, तो आने वाले दिनों में ग्रामीण इलाकों में जल संकट और गहरा सकता है।
गर्मी के मौसम में पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विभाग को जल्द से जल्द रिक्त पदों पर नियुक्ति करने की जरूरत है, ताकि आम जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े।

CG NEWS: हैंडपंप मैकेनिकों के 414 पद खाली, मंत्रियों के इलाकों में भी सरकारी बोरवेल भगवान भरोसे



















