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CG High Court Decision: श्मशान भूमि विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अंतरिम राहत से इनकार, दावा सही निकला तो मिलेगा मुआवजा

बेमेतरा की विवादित जमीन मामले में याचिकाकर्ता को नहीं मिली राहत, अंतिम सुनवाई में मुआवजे के अधिकार पर होगा विचार

CG High Court Decision: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेमेतरा जिले की विवादित श्मशान भूमि से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेखों में संशोधन पहले ही किया जा चुका है और प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई है। ऐसे में इस चरण पर अंतरिम राहत देने का कोई औचित्य नहीं बनता।

हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि अंतिम सुनवाई में याचिकाकर्ता का दावा सही पाया जाता है तो उसे कानून और नियमों के तहत उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

मामला बेमेतरा जिले के नवागढ़ विकासखंड स्थित ग्राम छुटापार की भूमि से जुड़ा है। याचिकाकर्ता धनेश कुमार ने अदालत को बताया कि उन्होंने खसरा नंबर 109 की भूमि का एक हिस्सा देवादास नामक व्यक्ति से विधिवत पंजीयन कर खरीदा था।

याचिका के अनुसार, प्रशासन ने 5 जून 2026 को बेदखली वारंट जारी कर 8 जून तक भूमि खाली करने का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पहले भी हाईकोर्ट पहुंच चुका था मामला

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि इससे पहले हाईकोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए एसडीएम (राजस्व) नवागढ़ के पास भेजा था। लेकिन अधिकारियों ने मामले पर पुनर्विचार नहीं किया और कार्रवाई जारी रखी।

श्मशान भूमि बताकर प्रशासन ने की कार्रवाई

राज्य शासन की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विवादित भूमि गांव के वाजिब-उल-अर्ज अभिलेख में श्मशान भूमि के रूप में दर्ज है। प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया है और निर्माण को भी हटा दिया गया है।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि प्रशासनिक आदेश का पालन पहले ही किया जा चुका है, इसलिए अंतरिम राहत का कोई आधार नहीं बनता।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि चूंकि रिकॉर्ड में बदलाव और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए फिलहाल यथास्थिति बहाल नहीं की जा सकती।

हालांकि न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की कि यदि अंतिम सुनवाई में याचिकाकर्ता का दावा सही साबित होता है, तो उसे भूमि के बदले नियमानुसार उचित मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए।

अगली सुनवाई पर टिकी नजरें

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामले की अंतिम सुनवाई पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। आगामी सुनवाई में भूमि स्वामित्व, प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता और संभावित मुआवजे के मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

Kirti Goswami

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