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Bilaspur High Court: फर्जी पुलिस बनकर अपहरण और वसूली के मामले में हाईकोर्ट सख्त, एसएसपी से मांगा शपथ पत्र, आरोपी को नहीं मिली राहत

दो युवकों को बंधक बनाकर धमकाने और रकम वसूलने के आरोपों को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से किया इंकार

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फर्जी पुलिसकर्मी बनकर दो युवकों का कथित अपहरण, बंधक बनाने और वसूली करने के मामले में आरोपी को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आरोपी द्वारा दायर एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर संज्ञेय अपराध बनता है और इस स्तर पर जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आसमा सिटी, सकरी निवासी सतीश मिश्रा की याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

क्या है पूरा मामला?

सकरी थाना क्षेत्र की निवासी साक्षी जोशी ने 28 अप्रैल 2026 को सतीश मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, फरवरी 2026 के दौरान सतीश मिश्रा ने उसके बेटे मयंक जोशी और उसके मित्र उज्ज्वल राणा को अपने घर बुलाया।

आरोप है कि मिश्रा ने दोनों युवकों पर अपने बेटे के साथ चोरी करने का आरोप लगाया और घर में मौजूद कुछ लोगों को पुलिस अधिकारी बताकर उनसे मुलाकात कराई। इसके बाद दोनों युवकों को कथित रूप से बंधक बनाकर धमकाया गया और पुलिस लिखी गाड़ियों में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि युवकों को डराकर उनसे बड़ी रकम वसूलने की कोशिश की गई। मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 140(3), 308(5) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है।

आरोपी पक्ष ने बताया झूठा मामला

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता राजीव कुमार दुबे ने अदालत को बताया कि एफआईआर पूरी तरह झूठी और दुर्भावनापूर्ण है। उनका कहना था कि मयंक जोशी और उज्ज्वल राणा ने उनके मुवक्किल के घर से 75 से 80 लाख रुपये के आभूषण चोरी किए थे।

उन्होंने अदालत को बताया कि इस संबंध में पहले पुलिस अधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की गई थी तथा 11 अप्रैल 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की गई थी। आरोपी पक्ष का दावा था कि उसी का बदला लेने के लिए यह एफआईआर दर्ज कराई गई।

एसएसपी से मांगा गया शपथ पत्र

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी ने पहले नियमित जमानत याचिका भी दायर की थी। उस मामले में हाईकोर्ट ने 12 मई 2026 को सुनवाई करते हुए बिलासपुर एसएसपी को व्यक्तिगत शपथ पत्र (हलफनामा) दाखिल करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने एसएसपी से कहा है कि वे अब तक की जांच में मिले सभी साक्ष्यों और तथ्यों की विस्तृत जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करें।

हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इंकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग अस्वीकार कर दी। अदालत ने कहा कि शिकायत में दर्ज तथ्यों से गंभीर संज्ञेय अपराध का प्रथम दृष्टया मामला बनता है और विस्तृत जांच आवश्यक है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा लगाए गए आरोपों और बचाव पक्ष के दावों की सत्यता का परीक्षण पुलिस जांच और निचली अदालत में ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है। इसलिए इस प्रारंभिक चरण में जांच प्रक्रिया को रोकना या एफआईआर रद्द करना उचित नहीं होगा।

जांच और सुनवाई पर टिकी नजरें

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें बिलासपुर पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले शपथ पत्र और आगे की जांच पर टिकी हैं। मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने जांच प्रक्रिया जारी रखने का संकेत दिया है, जिससे आने वाले दिनों में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

Kirti Goswami

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