स्वागत से शुरू होती शिक्षा, खेल-गीतों से संवर रहा नौनिहालों का भविष्य
आंगनबाड़ी केंद्र बने बच्चों के सर्वांगीण विकास की पहली पाठशाला

रायपुर, 5 अगस्त 2026। बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्ष उनके भविष्य की नींव तैयार करते हैं। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण केंद्र तक सीमित न रखकर प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और बाल विकास के समग्र केंद्र के रूप में विकसित कर रही है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में नवाचार आधारित गतिविधियों के जरिए बच्चों के लिए सुरक्षित और आनंदमय सीखने का वातावरण तैयार किया जा रहा है।
बलरामपुर का आंगनबाड़ी केंद्र बना मिसाल
बलरामपुर जिले के स्कूल पारा भनौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र ने इस दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है। यहां बच्चे पढ़ाई के साथ खेल, गीत, कहानी और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीख रहे हैं।
यह केंद्र नौनिहालों के लिए सीखने, खेलने, संवाद करने और आत्मविश्वास बढ़ाने की पहली पाठशाला बनकर उभरा है।
स्वागत चार्ट से बच्चों में बढ़ रहा आत्मविश्वास
केंद्र की खास पहल ‘स्वागत चार्ट’ है। आंगनबाड़ी पहुंचने वाला हर बच्चा अपनी पसंद के अनुसार स्वागत का तरीका चुन सकता है। चार्ट में गले मिलना, ताली देना, हाथ मिलाना, मुट्ठी मिलाना, कोहनी मिलाना और नमस्ते जैसे विकल्प दिए गए हैं।
बच्चा जिस विकल्प को चुनता है, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उसी तरीके से उसका स्वागत करती हैं। इस छोटी पहल से बच्चों का संकोच कम हो रहा है और वे खुद को सम्मानित एवं सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
गीत, खेल और कहानी से पढ़ाई बनी आसान
आंगनबाड़ी केंद्र में रोजाना प्रार्थना, स्वागत गीत, समूह गतिविधियां, शैक्षणिक खेल, कहानी-कथन, चित्र एवं रंग पहचान, अक्षर और अंक ज्ञान जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं।
बच्चों को रटने के बजाय खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है। गीत, कविता और रचनात्मक खेलों से बच्चों के भाषाई, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास में मदद मिल रही है।
इसके साथ ही बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, समूह में काम करने की आदत और आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है।
पौष्टिक आहार से स्वास्थ्य पर भी जोर
आंगनबाड़ी केंद्र में निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को पौष्टिक नाश्ता और गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है। बच्चों की उपस्थिति, वजन, ऊंचाई और स्वास्थ्य स्थिति की भी नियमित निगरानी की जाती है।
गर्भवती और धात्री माताओं को संतुलित आहार, स्वच्छता, स्तनपान, टीकाकरण और शिशु देखभाल से संबंधित जानकारी भी दी जा रही है।
बच्चों के लिए दूसरा घर बना आंगनबाड़ी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बच्चों के लिए परिवार जैसा स्नेहपूर्ण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करा रही हैं। इससे बच्चे बिना झिझक के गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
आंगनबाड़ी में पढ़ने वाली बालिका सौम्या की मां श्रीमती सोनम सोनी के अनुसार, यह केंद्र बच्चों के लिए सिर्फ पाठशाला नहीं, बल्कि दूसरे घर जैसा बन गया है। बच्चे अब खुशी-खुशी आंगनबाड़ी जाते हैं और घर लौटकर गीत, कविताएं और दिनभर सीखी बातें उत्साह से बताते हैं।
बाल विकास का समग्र केंद्र बन रहे आंगनबाड़ी
प्रदेश में इस तरह की नवाचारी गतिविधियां दिखाती हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका अब केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं रही है। ये केंद्र प्रारंभिक बाल शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, संस्कार और सामाजिक विकास के समेकित केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।
स्कूल पारा भनौरा का आंगनबाड़ी केंद्र इसका उदाहरण है कि जहां शिक्षा की शुरुआत मुस्कान और स्वागत से होती है, वहां बच्चों में सीखने की खुशी और आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।









