Tanker Tender Scam: टैंकर टेंडर में सिंडिकेट और मिलीभगत का आरोप, नेता प्रतिपक्ष ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
रायपुर नगर निगम में वर्षों से एक ही समूह को टेंडर मिलने पर उठे सवाल, GPS सिस्टम और भुगतान प्रक्रिया पर भी घेरा प्रशासन

Tanker Tender Scam: Raipur Municipal Corporation में पानी सप्लाई के लिए जारी टैंकर टेंडर प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
नेता प्रतिपक्ष Akash Tiwari ने नगर निगम अधिकारियों और ठेकेदारों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वर्षों से एक ही समूह को टेंडर मिलने का आरोप
आरोप है कि पिछले कई वर्षों से सिंडिकेट बनाकर कुछ चुनिंदा लोगों को ही पानी टैंकर सप्लाई का काम दिया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, जिन फर्मों को पिछले वर्ष 2025 में टेंडर मिला था, उन्हीं को इस वर्ष भी कार्य आवंटित किया गया है।
जिन फर्मों के नाम सामने आए हैं उनमें शामिल हैं:
- मेसर्स केशव प्रसाद पांडे
- मेसर्स प्रज्ञा कंस्ट्रक्शन
- मेसर्स परिमल कश्यप
- मेसर्स अरविंद सिंह ठाकुर
- मेसर्स प्रवीण दीक्षित
- मेसर्स रफीक अहमद रायपुर
टेंडर प्रक्रिया पर उठे कई सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं:
- क्या नगर निगम में केवल यही 6 लोग काम करेंगे?
- सभी निविदा कर्ताओं की दरें और तारीखें समान कैसे?
- वर्षों से केवल इन्हीं फर्मों को काम क्यों मिल रहा?
- अन्य ठेकेदार सामने क्यों नहीं आ रहे?
- क्या इन सभी फर्मों के पीछे कोई एक ही संचालक है?
टेंडर राशि और भुगतान में भारी अंतर का आरोप
आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025 में लगभग 1 करोड़ रुपये का टेंडर जारी हुआ था, लेकिन भुगतान करीब 2 करोड़ 6 लाख रुपये तक किया गया।
अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब पिछले वर्ष इतना भुगतान हुआ, तो इस बार भी कम राशि का टेंडर क्यों जारी किया गया?
नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि टेंडर राशि और वास्तविक भुगतान में भारी अंतर “बड़े खेल” की ओर इशारा करता है।
GPS सिस्टम नहीं लगाने पर भी सवाल
आरोप यह भी लगाया गया कि टैंकर संचालन में अब तक GPS सिस्टम लागू नहीं किया गया।
विपक्ष का कहना है कि GPS आधारित निगरानी पहले लागू की जानी चाहिए थी ताकि टैंकरों की वास्तविक आवाजाही और पानी सप्लाई की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
Akash Tiwari ने मांग की है कि:
- पूरी टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए
- टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
- नगर निगम में कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगे
उन्होंने कहा कि लगातार एक ही समूह को काम मिलना गंभीर संदेह पैदा करता है और इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।









