143 गांव में जल संकट: डेंजर जोन में पहुंचे बिलासपुर के 143 गांव, भूजल स्तर गिरने से हैंडपंप दे रहे जवाब
Bilaspur जिले में बढ़ा जल संकट— 668 में से 143 गांव गंभीर स्थिति में, कई क्षेत्रों में 250 फीट नीचे चला गया जल स्तर

143 गांव में जल संकट: छत्तीसगढ़ के Bilaspur जिले में जल संकट गहराता जा रहा है। लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण अब 143 गांव डेंजर जोन में पहुंच गए हैं, जहां पेयजल और निस्तारी के लिए पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। 143 गांव में जल संकट
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) के अनुसार जिले में कुल 668 गांव हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में हैंडपंपों ने अभी से जवाब देना शुरू कर दिया है। मई और जून की भीषण गर्मी से पहले ही हालात बिगड़ने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। 143 गांव में जल संकट
200 से 250 फीट नीचे पहुंचा जल स्तर
विभाग के अनुसार इस बार भूजल स्तर पिछले वर्षों की तुलना में तेजी से गिरा है।
मुख्य स्थिति:
- अधिकांश हैंडपंपों में जल स्तर 200 से 250 फीट नीचे चला गया
- कई गांवों में हैंडपंपों से पानी आना बंद
- गर्मी बढ़ने के साथ संकट और बढ़ने की आशंका
- पेयजल के साथ निस्तारी की समस्या भी गंभीर
स्थिति को देखते हुए विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है।
वैकल्पिक व्यवस्था पर शुरू हुआ काम
जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने कई स्तरों पर काम शुरू किया है।
विभाग की कार्रवाई:
- हैंडपंपों में गहराई तक पाइप बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू
- नए जल स्रोत खोजने के लिए सर्वे
- जरूरत पड़ने पर नए बोर कराए जाएंगे
- पंचायत फंड से सहयोग लेने की तैयारी
अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बड़ी संख्या में हैंडपंप अनुपयोगी हो सकते हैं।
तखतपुर सबसे ज्यादा प्रभावित
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में Takhatpur विकासखंड सबसे ज्यादा प्रभावित है।
विकासखंडवार स्थिति:
- तखतपुर: 81 गांव प्रभावित
- Bilha:** 37 गांव प्रभावित
- Masturi:** 20 गांव प्रभावित
- Kota:** कई गांवों में जल स्तर गिरा
भीषण गर्मी के कारण तालाब और कुएं भी तेजी से सूखते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण आबादी पूरी तरह हैंडपंपों पर निर्भर हो गई है।
ज्यादा हैंडपंप भी बन रहे संकट का कारण
जानकारी के अनुसार जिले के 668 गांवों में 9 हजार से अधिक हैंडपंप लगाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा बोरिंग और हैंडपंप भी भूजल स्तर गिरने का एक बड़ा कारण हो सकते हैं।
इससे नए बोर कराने में भी अब तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
अधिकारियों ने जताई भविष्य को लेकर चिंता
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के ईई Rupesh Kumar Dhananjay ने बताया कि जिन गांवों में जल स्तर कम हो गया है, वहां पाइप बढ़ाकर पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पंचायतों के माध्यम से मोटर पंप लगाने की योजना बनाई जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि यदि इसी तरह हालात बने रहे, तो अगले 4–5 वर्षों में भूजल स्रोत पूरी तरह खत्म होने का खतरा बढ़ सकता है।



















