CG Petrol Diesel limit- पेट्रोल-डीजल की लिमिट तय! प्रति व्यक्ति अब सिर्फ इतना ही मिलेगा पेट्रोल-डीजल, पेट्रोल पंप मालिकों को Whatsapp….
देश में पेट्रोल-डीजल वितरण पर लगी सीमा? कंपनियों के मौखिक निर्देश से बढ़ी लोगों की चिंता

CG Petrol Diesel limit : मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल वितरण सीमित किए जाने की खबरों से चिंता बढ़ गई है। पेट्रोल पंप संचालकों को मौखिक रूप से सीमित मात्रा में ईंधन देने के निर्देश मिले हैं।
India में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा पेट्रोल पंप संचालकों को सीमित मात्रा में ईंधन वितरण करने के मौखिक निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक एक वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 250 लीटर डीजल और एक व्यक्ति को 50 लीटर पेट्रोल देने की सीमा तय की गई है। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन व्हाट्सएप संदेशों और मौखिक निर्देशों के जरिए कई पेट्रोल पंप संचालकों तक यह सूचना पहुंचाई गई है।
बताया जा रहा है कि पेट्रोलियम कंपनियां पिछले चार महीनों की औसत बिक्री के आधार पर पेट्रोल पंपों को ईंधन की सप्लाई तय कर रही हैं। इसी वजह से कई जगहों पर सीमित वितरण शुरू कर दिया गया है। खासकर डीजल की बिक्री को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
इस फैसले के बाद ट्रांसपोर्ट सेक्टर, किसानों और आम उपभोक्ताओं में चिंता का माहौल है। लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक और बस ऑपरेटरों का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिलने से संचालन प्रभावित हो सकता है। इससे माल परिवहन में देरी और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में भी डीजल की संभावित जमाखोरी रोकने के लिए जेरीकेन और ड्रम में ईंधन बिक्री पर निगरानी बढ़ा दी गई है। कई पेट्रोल पंप संचालकों को बिना उचित कारण बड़ी मात्रा में डीजल नहीं देने के निर्देश दिए गए हैं।
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खेती-किसानी से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और अन्य कृषि मशीनों के संचालन में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इससे किसानों की लागत और परेशानी दोनों बढ़ने की आशंका है।
व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि ईंधन वितरण पर यह नियंत्रण जारी रहा तो माल ढुलाई दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों और यात्री परिवहन किराए पर पड़ सकता है।
फिलहाल पेट्रोलियम कंपनियों या सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में लोग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।


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