CG High Court News: बिलासपुर हाई कोर्ट ने अफसरों को लगाई फटकार, 30 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट
बारिश के दौरान जलभराव और बिजली कटौती पर स्वतः संज्ञान याचिका की सुनवाई, ऊर्जा विभाग और नगर निगम के अधिकारियों को व्यक्तिगत निगरानी के निर्देश

CG High Court News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में बारिश के दौरान जलभराव और लगातार बिजली कटौती के मुद्दे पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि सिर्फ कार्ययोजना बनाना पर्याप्त नहीं है, उसका लाभ आम जनता को जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।
अधिकारियों से 30 जुलाई तक मांगी प्रगति रिपोर्ट
हाई कोर्ट ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव, CSPDCL के प्रबंध निदेशक (MD) और बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को व्यवस्थाओं की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी अधिकारियों को 30 जुलाई 2026 तक शपथ पत्र के साथ ठोस प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए विभाग ने बताई यह योजना
ऊर्जा विभाग और CSPDCL की ओर से कोर्ट में दायर शपथ पत्र में बताया गया कि 3 जुलाई 2026 को हुई राज्य स्तरीय बैठक में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार हैं—
- टूटने वाले सीमेंट पोल की जगह मजबूत लोहे के खंभे लगाए जाएंगे।
- मंगला और कोनी में दो नए बिजली सप्लाई जोन बनाए जाएंगे।
- मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना के तहत ₹10 करोड़ की मंजूरी देकर खुले तारों की जगह Covered Conductors लगाए जाएंगे।
- बिजली बहाली के लिए अतिरिक्त स्काईलिफ्ट वाहन तैनात किए जाएंगे।
- एक EHV सब-स्टेशन और दो 33/11 केवी सब-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
- शिकायत निवारण और रखरखाव के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी।
- उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए कॉल सेंटर टाइमलाइन लागू की जाएगी।
नगर निगम ने भी कोर्ट में दी जानकारी
बिलासपुर नगर निगम आयुक्त ने शपथ पत्र में बताया कि जलभराव से निपटने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
- नेहरू चौक स्थित विकास भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष (Flood Control Room) स्थापित किया गया है।
- अप्रैल 2026 से सभी 8 जोनों में नालों और नालियों की सफाई अभियान जारी है।
- जल निकासी कार्य के लिए 14 विशेष वाहन लगाए गए हैं।
- आपात स्थिति से निपटने के लिए JCB, पंप और राहत सामग्री की व्यवस्था की गई है।
हाई कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
शपथ पत्रों का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि योजनाएं तैयार कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि—
- मानसून के दौरान सड़कों और गलियों में अनावश्यक जलभराव नहीं होना चाहिए।
- बिजली आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
- जनता की शिकायतों का बिना किसी देरी के तत्काल समाधान किया जाए।
- संबंधित अधिकारी स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी करें।
30 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 निर्धारित की है। तब तक सभी संबंधित विभागों को अपने कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट हाई कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।









