Chhattisgarh High Court: कलेक्टर के अधिकारों पर हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, निलंबन आदेश निरस्त
बालोद कलेक्टर द्वारा प्राचार्य के खिलाफ जारी निलंबन आदेश हाई कोर्ट ने किया निरस्त, कहा- सक्षम प्राधिकारी ही कर सकता है ऐसी कार्रवाई

Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारों की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि कलेक्टर को क्लास-2 (द्वितीय श्रेणी) राजपत्रित अधिकारी को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने बालोद कलेक्टर द्वारा जारी एक सरकारी स्कूल की प्राचार्य के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
दुर्ग निवासी निशा मून, जो बालोद जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, देवरी में प्राचार्य के पद पर पदस्थ हैं, ने अपने निलंबन आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
बालोद कलेक्टर ने 7 मई 2026 को उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी किया था, जिसके खिलाफ उन्होंने याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता की ओर से क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नीरज चौबे ने कोर्ट को बताया कि प्राचार्य का पद द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी (Class-2 Gazetted Officer) का होता है।
उन्होंने दलील दी कि प्रचलित सेवा नियमों के अनुसार कलेक्टर ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं। इसलिए जारी किया गया निलंबन आदेश विधि विरुद्ध है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह कानूनी स्थिति पहले से स्पष्ट है कि कलेक्टर क्लास-2 राजपत्रित अधिकारी को निलंबित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं।
कोर्ट ने माना कि बालोद कलेक्टर द्वारा जारी आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर था, इसलिए इसे वैध नहीं माना जा सकता।
कलेक्टर का आदेश रद्द
हाई कोर्ट ने 7 मई 2026 को जारी निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि आवश्यक समझे तो सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से कानून के अनुरूप नया आदेश जारी किया जा सकता है।
फैसले का महत्व
हाई कोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक अधिकारों की स्पष्ट सीमा तय करने वाला माना जा रहा है। इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि सेवा नियमों के तहत केवल वही प्राधिकारी किसी राजपत्रित अधिकारी के विरुद्ध निलंबन जैसी कार्रवाई कर सकता है, जिसे कानूनन यह अधिकार प्राप्त हो।









