CG High Court: 17 साल के एरियर्स की मांग पर कर्मचारी को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
मुंगेली जनपद पंचायत के कर्मचारी ने 17 वर्षों के कथित अंतर वेतन की मांग की थी, कोर्ट ने कहा— लंबे समय तक चुप रहने के बाद राहत नहीं दी जा सकती

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 17 वर्षों के कथित अंतर वेतन (एरियर्स) की मांग को लेकर दायर एक याचिका को खारिज करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई कर्मचारी नियमितीकरण का आदेश बिना आपत्ति स्वीकार कर लेता है और वर्षों बाद एरियर्स की मांग लेकर अदालत पहुंचता है, तो उसे राहत नहीं दी जा सकती।
1998 में हुई थी नियुक्ति, बाद में निरस्त हुआ आदेश
मामला मुंगेली जनपद पंचायत में वर्तमान में लेखापाल के पद पर कार्यरत रामकुमार दीक्षित से जुड़ा है। उनकी नियुक्ति 31 जुलाई 1998 को सहायक ग्रेड-3 के पद पर हुई थी। हालांकि सामान्य सभा से अनुमोदन नहीं मिलने के कारण 13 नवंबर 1998 को उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई।
नियुक्ति निरस्त होने के बाद उन्होंने तत्कालीन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अदालत से स्थगन आदेश मिलने के कारण वे सेवा में बने रहे और मामला वर्षों तक न्यायालय में लंबित रहा।
2015 में सेवाएं हुईं नियमित
वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए उनकी सेवाओं को नियमित करने का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने 31 जुलाई 1998 से 22 जून 2015 तक के कथित अंतर वेतन और एरियर्स की मांग को स्वीकार नहीं किया था।
इसके बावजूद कर्मचारी ने लगभग छह वर्ष बाद फिर से एरियर्स भुगतान की मांग को लेकर नई याचिका दायर कर दी।
कोर्ट ने कहा- समय पर अधिकार मांगना जरूरी
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने 2015 के आदेश को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया था और लंबे समय तक कोई कानूनी कदम नहीं उठाया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि कानून उन्हीं लोगों की सहायता करता है जो अपने अधिकारों के प्रति समय पर सजग रहते हैं। वर्षों तक निष्क्रिय रहने के बाद वित्तीय लाभ की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
आदेश स्वीकार करना माना जाएगा अधिकार का परित्याग
हाईकोर्ट ने कहा कि नियमितीकरण के आदेश को बिना चुनौती दिए स्वीकार करना याचिकाकर्ता द्वारा अपने दावे के अधिकार का परित्याग (Waiver) माना जाएगा। ऐसे में उसी विषय पर वर्षों बाद राहत मांगना न्यायसंगत नहीं है।
सरकार की दलीलों से सहमत हुआ हाईकोर्ट
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि इतने लंबे समय बाद एरियर्स संबंधी दावा स्वीकार करने से शासन पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ेगा और यह प्रशासनिक सिद्धांतों के विपरीत होगा।
कोर्ट ने इन तर्कों को उचित मानते हुए कहा कि देरी से दायर वित्तीय दावों को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।
फैसले की अहम बात
- 17 वर्षों के एरियर्स की मांग कोर्ट ने ठुकराई।
- 2015 में कर्मचारी की सेवा नियमित हुई थी।
- नियमितीकरण आदेश बिना आपत्ति स्वीकार किया गया था।
- छह साल बाद एरियर्स मांगने पर कोर्ट ने राहत देने से इनकार किया।
- हाईकोर्ट ने कहा— अधिकारों के लिए समय पर कदम उठाना जरूरी है।








