CG High Court Decision: शिक्षाकर्मियों को नहीं मिलेगा शिक्षकों जैसा वेतनमान, हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पंचायत से नियुक्त शिक्षाकर्मी स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों के समान लाभ के हकदार नहीं

CG High Court Decision: Bilaspur स्थित Chhattisgarh High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पंचायत विभाग के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मी, स्कूल शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान और सेवा लाभ पाने के हकदार नहीं हैं। CG High Court Decision
इस फैसले से प्रदेश के हजारों शिक्षाकर्मियों को बड़ा झटका लगा है। CG High Court Decision
डिवीजन बेंच ने खारिज की अपील
चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने शिक्षाकर्मियों की अपील को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ताओं ने 10 और 20 साल की सेवा पूरी होने पर क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ देने की मांग की थी, जिसे पहले ही विभाग द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था।
क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ता शिक्षाकर्मी वर्ग-2 और वर्ग-3 के रूप में पंचायत विभाग के तहत नियुक्त हुए थे। बाद में उनकी सेवाओं को राज्य सरकार की नीति के तहत स्कूल शिक्षा विभाग में समाहित कर दिया गया।
उन्होंने 10 मार्च 2017 के परिपत्र के आधार पर वेतनमान में बढ़ोतरी की मांग की थी।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया:
- संबंधित परिपत्र केवल स्कूल शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षकों पर लागू होता है
- पंचायत कैडर के शिक्षाकर्मियों पर यह नियम लागू नहीं होता
- पंचायत सेवा को स्कूल शिक्षा विभाग के बराबर नहीं माना जा सकता
समानता का दावा क्यों खारिज हुआ?
कोर्ट ने कहा कि “समानता” का दावा तभी मान्य होता है जब दोनों पक्ष सभी पहलुओं में समान हों।
यहां याचिकाकर्ता पंचायत विभाग से नियुक्त थे, जबकि जिन मामलों का हवाला दिया गया, उनमें शिक्षक सीधे सरकारी नियुक्ति वाले थे। इसलिए दोनों को समान नहीं माना जा सकता।


















