CG Monsoon 2026: अगले 7 दिन भारी बारिश की संभावना कम, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी
प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पहुंचने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं; कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को वैकल्पिक खेती और जल संरक्षण अपनाने की सलाह दी

CG Monsoon 2026: जून का महीना समाप्ति की ओर है और जुलाई की शुरुआत में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में अब भी अच्छी बारिश का इंतजार बना हुआ है। मानसून प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में पहुंच चुका है, फिर भी पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में व्यापक और मूसलाधार बारिश की संभावना कम है, हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा जारी रह सकती है।
मानसून पहुंचा, लेकिन बारिश अब भी कम
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है। इसके बावजूद रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी सहित कई जिलों में केवल हल्की बारिश दर्ज की गई है, जो खेती के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही। हाल के दिनों में मुंगेली में सर्वाधिक 50 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
बस्तर संभाग में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन वहां भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है।
धान की बुवाई पर पड़ा असर
पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण धान की बुवाई प्रभावित हो रही है। खेतों में नमी की कमी से किसान समय पर खेती का कार्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए सुझाव दिए हैं—
- कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करें।
- जहां संभव हो, धान की सीधी बुवाई को प्राथमिकता दें।
- खेतों में मेड़बंदी कर वर्षा जल का संरक्षण करें।
- उड़द, तिल और अरहर जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती पर भी विचार करें।
- मौसम के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं।
मौसम विभाग की अपील
मौसम विभाग ने किसानों से मौसम संबंधी अपडेट पर लगातार नजर रखने की अपील की है। विभाग का कहना है कि मानसून की गतिविधियों में बदलाव के साथ स्थानीय स्तर पर वर्षा की स्थिति बदल सकती है, इसलिए आधिकारिक मौसम बुलेटिन के आधार पर ही कृषि संबंधी निर्णय लेना उचित होगा।









