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CG PSC 2003 Scam: जिसे हाई कोर्ट ने बताया घोटाला, अब सुप्रीम कोर्ट की लोक अदालत में सुलह की कोशिश, याचिकाकर्ता बोलीं- समझौता नहीं, न्याय चाहिए

छत्तीसगढ़ पीएससी 2003 भर्ती विवाद में नया मोड़, हाई कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी मानते हुए सूची संशोधित करने दिए थे आदेश

CG PSC 2003 Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CG PSC 2003 Scam मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित विशेष लोक अदालत में इस मामले के पक्षकारों को बुलाया गया है।

मुख्य याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे और अन्य संबंधित पक्षों को मुंगेली और कबीरधाम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

हालांकि याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे ने साफ कहा है कि इस मामले में किसी भी प्रकार के समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है और उन्हें केवल न्याय चाहिए।

 हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में मानी थी गड़बड़ी

वर्ष 2006 में वर्षा डोंगरे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए Chhattisgarh High Court ने वर्ष 2017 में बड़ा फैसला सुनाया था।

हाई कोर्ट ने माना था कि वर्ष 2003 की पीएससी भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई थीं। कोर्ट ने उत्तर पुस्तिकाओं में अंकों की हेराफेरी और नियमों का उल्लंघन कर अपात्र उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने की बात कही थी।

इसके बाद कोर्ट ने चयन सूची संशोधित कर नई सूची जारी करने का आदेश दिया था।

 सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

हाई कोर्ट के फैसले को संजय चंदन त्रिपाठी समेत अन्य पक्षकारों ने Supreme Court of India में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी और तब से मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

अब सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत के जरिए विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

 याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे ने क्या कहा?

मुख्य याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे का कहना है कि हाई कोर्ट पहले ही उनके पक्ष में फैसला दे चुका है और राज्य सरकार को उस आदेश का पालन करना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि:

“इस मामले में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है। फैसला केवल सुप्रीम कोर्ट से ही होना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि एसीबी जांच में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की पुष्टि हो चुकी है।

 किन अधिकारियों और उम्मीदवारों पर उठे थे सवाल?

हाई कोर्ट और एसीबी की रिपोर्ट में कई चयनित उम्मीदवारों और अधिकारियों के नाम सामने आए थे।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • कई उम्मीदवारों को कम अंक होने के बावजूद चयनित किया गया
  • 52 उम्मीदवार इंटरव्यू के पात्र ही नहीं थे
  • 17 पात्र उम्मीदवारों को चयन सूची से बाहर रखा गया

कोर्ट ने विशेष रूप से राजीव सिंह चौहान को गलत तरीके से एससी कोटे में चयनित मानते हुए सेवा से हटाने के निर्देश दिए थे।

इसके अलावा ऊषा किरण बरई, सारिका रामटेके, मनोज लारोकर और सुनील कुमार सहित कई चयन विवादों में रहे।

 दो दर्जन से ज्यादा अफसर हो सकते थे प्रभावित

यदि हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार दोबारा स्केलिंग और नई चयन सूची जारी होती, तो दो दर्जन से अधिक अधिकारियों पर असर पड़ सकता था।

बताया गया कि इनमें से कुछ अधिकारी वर्तमान में आईएएस पद तक पहुंच चुके हैं।

TheBharatExpress Desk

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