Mahtari Vandana Yojana Scam: पुरुष को मिला महिलाओं की योजना का लाभ, सत्यापन पर उठे सवाल
खैरागढ़ में महतारी वंदन योजना के सत्यापन में बड़ी लापरवाही, पुरुष हितग्राही का आवेदन हुआ स्वीकृत, विभागीय जांच के बाद रिकवरी की कार्रवाई

Mahtari Vandana Yojana Scam: छत्तीसगढ़ सरकार की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित महतारी वंदन योजना में खैरागढ़ जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पुरुष हितग्राही का आवेदन न केवल स्वीकृत हुआ, बल्कि उसके बैंक खाते में लगातार 12 महीनों तक हर महीने ₹1,000 की सहायता राशि भी पहुंचती रही। मामले के सामने आने के बाद विभागीय सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कैसे हुआ पूरा फर्जीवाड़ा?
जानकारी के अनुसार, ग्राम मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू का आवेदन महतारी वंदन योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज हुआ। हैरानी की बात यह रही कि आवेदन में हितग्राही का नाम और पति का नाम दोनों ‘तिलोक साहू’ दर्ज होने के बावजूद आवेदन को पहले आंगनबाड़ी स्तर और फिर सुपरवाइजर स्तर पर सत्यापित कर दिया गया।
इसके बाद संबंधित बैंक खाते में लगातार 12 महीने तक योजना की राशि जमा होती रही।
सत्यापन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आवेदन को ‘सत्यापित’ दिखाया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब आवेदन में स्पष्ट रूप से नाम और विवरण संदिग्ध थे, तब भी संबंधित अधिकारियों ने इसे किस आधार पर मंजूरी दी।
फिलहाल पोर्टल पर आवेदन की स्थिति ‘Permanent Hold’ तथा ‘लाभ त्याग अनुरोध स्वीकृत’ दिखाई दे रही है।
12 महीने भुगतान, लेकिन रिकवरी केवल ₹10 हजार की?
मामले में एक और बड़ा सवाल सामने आया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड के मुताबिक हितग्राही को 12 महीने तक योजना का लाभ मिला, जबकि 3 जुलाई 2026 को एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना, खैरागढ़ द्वारा बैंक को जारी पत्र में केवल ₹10,000 की राशि शासन के खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि भुगतान 12 माह तक हुआ तो रिकवरी केवल 10 माह की राशि की ही क्यों की गई? शेष भुगतान का क्या हुआ, यह विभागीय जांच का विषय बना हुआ है।
एक साल तक नहीं पकड़ पाया सत्यापन तंत्र
महतारी वंदन योजना में पात्रता की जांच के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर स्तर पर सत्यापन की व्यवस्था है। इसके बावजूद एक पुरुष हितग्राही का आवेदन स्वीकृत होकर एक वर्ष तक भुगतान जारी रहना विभागीय निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है।
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई?
मामला सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायत नहीं होती तो क्या भुगतान आगे भी जारी रहता? केवल राशि की रिकवरी पर्याप्त मानी जाएगी या फिर आवेदन को सत्यापित करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
अधिकारी ने क्या कहा?
जिला परियोजना अधिकारी प्रीत राम खुटेल ने बताया कि संबंधित हितग्राही से राशि की रिकवरी कर ली गई है। हालांकि, आवेदन किस आधार पर सत्यापित हुआ, 12 महीने तक भुगतान कैसे जारी रहा और रिकॉर्ड व रिकवरी राशि में अंतर क्यों है, इन सवालों पर उन्होंने रिकॉर्ड देखने के बाद जानकारी देने की बात कही।
अब पूरे मामले की विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।











