Liquor Overrating News: शराब की हर बोतल पर अतिरिक्त वसूली का आरोप, ओवररेटिंग से 1500 करोड़ की कमाई का दावा
तय कीमत से 10 से 20 रुपये अधिक वसूली की शिकायतें; शराब बिक्री व्यवस्था और निगरानी पर उठे सवाल

Liquor Overrating News: छत्तीसगढ़ में सरकारी नियंत्रण वाली शराब बिक्री व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रदेशभर की शराब दुकानों में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने के आरोप सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि देसी और विदेशी शराब की लगभग हर बोतल पर 10 से 20 रुपये तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है, जिससे सालाना करीब 1500 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो रही है। Liquor Overrating News
हर बोतल पर 10 से 20 रुपये अधिक वसूली का आरोप
प्रदेश में शराब का पूरा कारोबार राज्य सरकार के नियंत्रण में संचालित होता है। शराब की कीमतें सरकार द्वारा तय की जाती हैं और दुकानों के संचालन की व्यवस्था भी सरकारी निगरानी में होती है। Liquor Overrating News
इसके बावजूद राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में उपभोक्ताओं से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। आरोप है कि अधिकांश दुकानों में शराब की बोतलों पर 10 से 20 रुपये तक अतिरिक्त रकम ली जा रही है।
प्रतिदिन 28.65 लाख बोतलों की बिक्री
आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 28 लाख 65 हजार शराब की बोतलों की बिक्री हुई।
औसत दैनिक बिक्री का विवरण:
- स्प्रिट शराब: 7.21 लाख बोतल
- माल्ट शराब: 1.98 लाख बोतल
- मसाला शराब: 7.66 लाख बोतल
- प्लेन शराब: 11.80 लाख बोतल
ओवररेटिंग से करोड़ों की अतिरिक्त वसूली का दावा
यदि प्रत्येक बोतल पर औसतन 15 रुपये अतिरिक्त वसूली मान ली जाए, तो प्रतिदिन लगभग 4.30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि एकत्र होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इसी आधार पर:
- प्रतिदिन अनुमानित अतिरिक्त वसूली: 4.30 करोड़ रुपये
- प्रतिमाह अनुमानित अतिरिक्त वसूली: लगभग 129 करोड़ रुपये
- सालाना अनुमानित अतिरिक्त वसूली: 1500 करोड़ रुपये से अधिक
हालांकि यह आंकड़े आरोपों और अनुमानित गणनाओं पर आधारित हैं तथा इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
11 हजार करोड़ के राजस्व के बीच उठे सवाल
छत्तीसगढ़ सरकार को शराब बिक्री से प्रतिवर्ष लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में ओवररेटिंग से जुड़ी शिकायतों ने आबकारी व्यवस्था की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूली जा रही है तो इसकी प्रभावी निगरानी और कार्रवाई आवश्यक है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
शराब दुकानों में ओवररेटिंग को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अब तक कोई व्यापक और प्रभावी अभियान दिखाई नहीं दिया है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिलती। वहीं प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग लगातार उठ रही है।
उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?
यदि किसी दुकान पर निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जाती है तो उपभोक्ता:
- शराब की बोतल पर अंकित एमआरपी अवश्य जांचें।
- खरीदारी की रसीद लें।
- संबंधित आबकारी विभाग या जिला प्रशासन को शिकायत दर्ज कराएं।
- उपभोक्ता अधिकारों के तहत कार्रवाई की मांग करें।
प्रदेश में शराब बिक्री व्यवस्था को लेकर उठे इन सवालों के बीच अब निगाहें सरकार और आबकारी विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।









