CG Dam Accident: गहरे पानी में पलटी नाव, तीन ग्रामीणों की मौत से गांवों में मातम
प्रतिबंधित क्षेत्र में देर रात मछली पकड़ने पहुंचे थे 9 ग्रामीण, नाव पलटने के बाद 6 ने तैरकर बचाई जान, 3 डूब गए

CG Dam Accident: सूरजपुर जिले के बतरा डैम में हुए दर्दनाक नाव हादसे में तीन ग्रामीणों की मौत हो गई। लगभग 34 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बुधवार सुबह तीसरे और अंतिम लापता ग्रामीण का शव बरामद कर लिया गया। इससे पहले मंगलवार को दो शव निकाले जा चुके थे। हादसे के बाद प्रभावित गांवों में शोक का माहौल है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार सोमवार देर रात करीब 2 बजे करंजी चौकी क्षेत्र स्थित बतरा डैम में यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि नौ ग्रामीण नाव से मछली पकड़ने डैम पहुंचे थे। इसी दौरान नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में पलट गई।
नाव पलटने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। नौ में से छह ग्रामीण किसी तरह तैरकर बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि तीन लोग गहरे पानी में डूब गए।
34 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और डीडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और संयुक्त रूप से तलाश अभियान शुरू किया गया।
- मंगलवार को दो ग्रामीणों के शव बरामद किए गए।
- तीसरे लापता ग्रामीण की तलाश लगातार जारी रही।
- बुधवार सुबह तीसरे और अंतिम शव को भी खोज लिया गया।
- शव मिलने के बाद रेस्क्यू अभियान समाप्त कर दिया गया।
प्रतिबंध के बावजूद मछली पकड़ने पहुंचे थे ग्रामीण
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बतरा डैम में फिलहाल मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू है।
अधिकारियों के अनुसार—
- पहले डैम में मछली पालन का ठेका दिया गया था।
- लीज अवधि समाप्त होने के बाद मत्स्य आखेट पर रोक लगा दी गई थी।
- इसके बावजूद कुछ ग्रामीण देर रात चोरी-छिपे मछली पकड़ने पहुंचे थे।
अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में नाव का उपयोग कैसे किया गया और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।
तीन गांवों में पसरा मातम
मृतक ग्रामीणों की पहचान ग्राम राईं, भैयाथान और उचडिह क्षेत्र के निवासियों के रूप में हुई है। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
ग्रामीणों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रशासन से सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की मांग की है।
प्रशासन की अपील
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि जलाशयों, डैम और प्रतिबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों का पालन करें।
प्रशासन का कहना है कि—
“जलाशयों में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश और जोखिम भरी गतिविधियों से बचना चाहिए।”









